जिस तरह स्वस्थ शरीर के लिए दिमाग का सही रहना बहुत जरूरी है, ठीक उसी प्रकार दिल का भी सही होना बहुत जरूरी है। इसलिए कहते है कि जीवन का कोई भी बड़ा फैसला दिल और दिमाग दोनों से लिया जाना चाहिए। एक स्वस्थ्य हृदय एक मिनट में लगभग 5 लीटर ब्लड पंप करता है। ऐसे यह ब्लड के द्वारा शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचता है, जिसकी वजह से शरीर के सभी अंग अपने काम अच्छे से कर पाते हैं। लेकिन थोड़ा सोचिए, ऐसे में दिल की धड़कन यदि धीरे चलने लगे या अचानक रुक जाए, तो क्या होगा? आइए जानते हैं, हार्ट ब्लॉकेज क्या है, हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण, कारण और इलाज, इत्यादि।
हार्ट ब्लॉकेज क्या है?
हार्ट ब्लॉकेज जिसे दिल की धड़कन का रुकना भी कहा जा सकता है, यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। शरीर के अंगों को सही से काम करने के लिए ऑक्सीजन और पोषक-तत्वों की जरूरत होती है, जो ब्लड के द्वारा अंगों तक पहुंचाया जाता है। हार्ट एक पंप की तरह काम करता है, जो शरीर के सभी अंगों तक ब्लड को पंप करता है।
लेकिन हार्ट को स्वयं भी ब्लड की जरूरत होती है और यह ब्लड कोरोनरी आर्टरी नाम की नसों के द्वारा हार्ट तक पहुंचता है। जब इन नसों के अंदर कोलेस्ट्रॉल, वसा या चर्बी जमने लगती है तब यह नालियां धीरे-धीरे शंकरा या संकुचित हो जाती है या बंद हो जाती है और खून का सप्लाई सही ढंग के नहीं हो पाता है, इसे ही हार्ट ब्लॉकेज के नाम से जानते हैं।
हार्ट ब्लॉकेज कितने प्रकार के होते हैं?
हार्ट ब्लॉकेज को मुख्य रूप से दो तरह से समझा जा सकता है:-
- कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज
- हार्ट ब्लॉकेज
कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज
यह स्थिति तब होती है जब हार्ट को ब्लड पहुंचाने वाली नालियों में कोलेस्ट्रॉल, फैटी इत्यादि पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसके निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:-
- आंशिक ब्लॉकेज- इस तरह के मामलों में ब्लॉकेज 50% से कम होता है और आर्टरी में ब्लड फ्लो थोड़ा-बहुत बना रहता है।
- मॉडरेट ब्लॉकेज- ऐसे मामलों में ब्लॉकेज 50% से 70% तक होता है और लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- कंप्लीट ब्लॉकेज- गंभीर मामलों में हार्ट अटैक का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसमें हृदय 70% से ज्यादा और 100% तक ब्लॉकेज रहता है।
हार्ट ब्लॉकेज में इलेक्ट्रिक सिग्नल की समस्या
हार्ट ब्लॉक की समस्या जन्म से भी मौजूद हो सकती है, लेकिन यह अक्सर जन्म के बाद पैदा होती है। इसमें हार्ट डिजीज और उम्र के साथ ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। इसे तीन भागों में बांटा गया है।
- फर्स्ट-डिग्री हार्ट ब्लॉक - इसमें मामूली समस्या शामिल होती है, जैसे हार्ट बीट कम आना या कोई लक्षण नहीं दिखता है। यदि लक्षण गंभीर नहीं है तो इलाज की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
- सेकंड-डिग्री हार्ट ब्लॉक - ऐसे मामलों में हार्ट बीट रुक-रुक आती है या कम आती है। इसमें सिग्नल खो जाते हैं। इस स्थिति में मरीज को चक्कर आ सकते हैं और पेसमेकर लगवाने की जरूरत हो सकती है।
- थर्ड-डिग्री हार्ट ब्लॉक - यह कम्पलीट हार्ट ब्लॉक होता है। इसमें हृदय के निचले चैंबर और उपरी चैंबर के बीच इलेक्ट्रिकल संपर्क नहीं हो पाता है। यह हार्ट डिजीज वाले मरीजों के लिए सामान्य पात है।
हार्ट ब्लॉकेज के शुरुआती लक्षण क्या है?
हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण क्या है? कई बार सामान्य लग सकते हैं, लेकिन यह जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसके लक्षण इस बात पर भी निर्भर करता है कि ब्लॉकेज किसी स्थान पर और कितना है। हार्ट ब्लॉकेज के सामान्य लक्षण निम्नलिखित है:-
- बार-बार बेहोशी आना
- सीने में दर्द और दबाव की समस्या
- थोड़ी मेहनत या हल्की चढ़ाई पर सांस फूलने की समस्या
- थोड़े से चलने या चढ़ाई में थकान की समस्या होना
- सांस लेने में परेशानी होना
- दिल का धड़कन अनियमित होना या तेजी से धड़कना
- बिना किसी कारण के शरीर से ठंडा पसीना आना
- उल्टी और मतली की समस्या
हार्ट ब्लॉकेज के कारण क्या है?
क्रोनरी आर्टरी में प्लाक जमने से हार्ट ब्लॉकेज की समस्या होती है। हार्ट ब्लॉकेज के मुख्य कारण निम्नलिखित है:-
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- डायबिटीज
- मोटापा
- अनहेल्दी भोजन
- खराब लाइफ स्टाइल
- मानसिक तनाव
- ज्यादा उम्र
- धूम्रपान
- शराब
- नींद में कमी
हार्ट ब्लॉकेज का पता कैसे लगाएं?
हार्ट ब्लॉकेज टेस्ट नाम क्या है? हार्ट ब्लॉकेज के निदान में यह पता किया जाता है कि क्रोनरी आर्टरीज में कहां, कितना और किस तरह का ब्लॉकेज है। हार्ट ब्लॉकेज का निदान निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है, हार्ट ब्लॉकेज टेस्ट नाम:-
- ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)
- एंजियोग्राफी जांच
- लीपिड प्रोफाइल टेस्ट - ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल
- हृदय के आसपास की जांच - कार्डियक कैथीटेराइजेशन
- एमआरआई
- स्ट्रेस टेस्ट
हार्ट ब्लॉकेज का इलाज क्या है?
हार्ट ब्लॉक ट्रीटमेंट हार्ट मरीज के उम्र, ब्लॉकेज की स्थिति और प्रकार के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इसके इलाज के लिए दवाएं, एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी किया जा सकता है:-
- दवाएं - कुछ मामलों में या हल्के मामलों में डॉक्टर ब्लॉकेज को बढ़ने से रोकने के लिए दवाओं का सहारा ले सकते हैं।
- एंजियोप्लास्टी - हार्ट ब्लॉकेज की समस्या गंभीर हो या ब्लॉकेज 70% से ज्यादा हो तो एंजियोप्लास्टी विधी अपनाई जाती है। इसमें एक पतली ट्यूब के जरिए आर्टरी में स्टेंट डाली जाती है और ब्लॉकेज को हटाया जाता है। इससे खून का प्रवाह सामान्य हो जाता है। इसमें बड़ी सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ती और रिकवरी जल्दी हो जाती है।
- बायपास सर्जरी - बायपास सर्जरी तब की जाती है जब एंजियोप्लास्टी कारगर नहीं होता है या ब्लॉकेज बहुत ज्यादा होता है। इसमें शरीर के दूसरी नसों के द्वारा जैसे पैर के नस या सीने की नस से रास्ते ब्लॉकेज को बायपास किया जाता है।
हार्ट ब्लॉकेज खोलने के लिए क्या खाएं?
हार्ट ब्लॉकेज की समस्याओं से उबरने के लिए आपका सही आहार और हेल्दी लाइफ स्टाइल बहुत ज्यादा जरूरी होता है। हांलाकि नसों में हुई इन ब्लॉकेज को केवल खाने-पीने में बदलाव करके ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन जरूरी आहार लेने से ब्लॉकेज को रोककर हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। हार्ट ब्लॉकेज को खोलने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थ बहुत ज्यादा सहायक होते हैं:-
- अनार बहुत फायदेमंद होता है। इसका खाने से आपके हार्ट ब्लॉकेज की स्थिति में सुधार की जा सकती है।
- हार्ट हेल्थ के बेहतर के लिए हल्दी का सेवन बहुत लाभकारी होता है। यह बंद धमनियों को खोलने में प्रभावी होता है।
- दालचीनी खाने से शरीर के खराब कोलेस्ट्रोल लेवल को कम किया जा सकता है और हृदय को मजबूत बनाया जा सकता हैं।
- लहसुन का सेवन संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है, यह रक्त संचार को तेज कर ब्लॉकेज खोलने में सहायक हो सकता है।
- लाल मिर्च को लोगों ने अपने आहार से बाहर कर दिया है। इसमें पाया जाने वाले कैप्सेसिन नामक तत्व बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है।
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सारांश
सही जीवनयापन के लिए दिलोदिमाग का सही होना बहुत जरूरी है। दिल जो पूरे शरीर के अंगों तक खून के जरिए ऑक्सीजन और पोषक-तत्वों की आपूर्ती करता है, इसमें थोड़ी सी भी गड़बड़ी आपके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। हार्ट ब्लॉकेज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसमें हृदय की धमनियों में किसी कारणवस रुकावट आ जाती है और ब्लड फ्लो सही से नहीं हो पाता है। ऐसे में हार्ट में पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है, जिसकी वजह से हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है।
हार्ट ब्लॉकेज को सही समय पर पहचान कर बेहतर इलाज के द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन इसका इलाज इतना भी आसान नहीं है। इसमें लाखों रुपए खर्च हो सकते हैं जो कि एक आम साधारण जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी रकम हो सकती है। इसलिए ऐसे में हार्ट ब्लॉकेज जैसी गंभीर दिल की बीमारियों को स्वास्थ्य बीमा से जोड़ना एक बेहतर कदम हो सकता है। यहां आपको हृदय के बेहतर इलाज के लिए अस्पताल और खर्च के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इन मामलों में स्वास्थ्य बीमा बीमारियों के लिए नेटवर्क हॉस्पिटल में कैशलेस कवरेज भी प्रदान करते हैं।
हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए आप केयर हेल्थ के हार्ट मेडिक्लेम पॉलिसी को खरीद सकते हैं। इसमें आपको इन-पेशेंट केयर सुविधा यानी यदि आप 24 घंटे से ज्यादा समय तक अस्पताल में भर्ती होते हैं तो बीमा कंपनी कवरेज प्रदान करती है, डे-केयर ट्रीटमेंट मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत कई हृदय रोगों को डे-केयर में भी कवर किया जाता है, प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन यानी अस्पताल में भर्ती होने के 30 दिन पहले और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 60 दिन बाद तक के लिए कवरेज प्रदान किया जाता है, एंबुलेंस कवर, इत्यादि जैसी कई सारी स्वास्थ्य सुविधाएं आपको प्रदान की जाती है।
डिस्क्लेमर: उपरोक्त जानकारी केवल संदर्भ उद्देश्यों के लिए है। सही चिकित्सीय सलाह के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। स्वास्थ्य बीमा लाभ पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अधीन हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने पॉलिसी दस्तावेज़ पढ़ें।