टखने की मोच एक आम मस्कुलोस्केलेटल चोट है, जो खेल-कूद, दौड़ने या चलते समय पैर के अचानक मुड़ने से हो सकती है। जब हमारे पैर के टखने के आस-पास के लिगामेंट्स (Ligaments) अचानक मुड़ने, या किसी झटके के कारण अत्यधिक खिंच जाते हैं या फट जाते हैं, तो उसे मोच आना कहते हैं। खेल के मैदान पर दौड़ते समय, असमान जमीन पर चलते हुए या फिर रोजमर्रा के साधारण काम करते समय पैर का संतुलन बिगड़ना इस चोट का आम कारणों में शामिल है।
अधिकांश लोग इसे एक मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे भविष्य में टखने में स्थायी कमजोरी और बार-बार मोच आने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए, गंभीर लक्षण होने या चोट में सुधार न होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
आइए जानते हैं कि मोच और स्ट्रेन क्या है, इसके मुख्य कारण और लक्षण क्या हैं और मोच या स्ट्रेन आने पर क्या करना चाहिए?
मोच (Sprain) क्या है और यह स्ट्रेन (Strain) से कैसे अलग है?
शारीरिक गतिविधियों या अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण पैरों या जोड़ों में चोट लगना एक आम समस्या है। अक्सर लोग 'मोच' (Sprain) और 'स्ट्रेन' (Strain) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। अपनी चोट को सही ढंग से समझने और सही उपचार के लिए इनके बीच का अंतर जानना बेहद जरूरी है।
मोच क्या है?
जब दो हड्डियों को आपस में जोड़ने वाले मजबूत और लचीले टिश्यू, जिन्हें लिगामेंट्स कहा जाता है, अत्यधिक खिंच जाते हैं या टूट जाते हैं, तो उस स्थिति को मोच (Sprain) कहते हैं। यह आमतौर पर टखने (Ankle), घुटने या कलाई के मुड़ने या अचानक आए झटके के कारण होता है।
गंभीरता के आधार पर मोच तीन प्रकार (Grades) की होते हैं:
- ग्रेड I: लिगामेंट में मामूली खिंचाव आना।
- ग्रेड II: लिगामेंट का आंशिक रूप से फटना, जिससे जोड़ में ढीलापन आ जाता है।
- ग्रेड III: लिगामेंट का पूरी तरह से टूट जाना, जिससे जोड़ पूरी तरह अस्थिर हो जाता है।
स्ट्रेन (Strain) क्या है?
जब मांसपेशियों या मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले टिश्यूज, जिन्हें टेंडन्स (Tendons) कहा जाता है, में अत्यधिक खिंचाव आ जाता है या वे फट जाते हैं, तो उसे स्ट्रेन कहते हैं। आम बोलचाल की भाषा में इसे 'नस चढ़ना' या 'मांसपेशी का खिंचना' भी कहा जाता है। यह ज्यादातर पीठ, पैर (विशेषकर हैमस्ट्रिंग) की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ने या भारी वजन उठाने के कारण होता है।
पैर में मोच के मुख्य कारण (Causes of Sprain)
मोच की समस्या मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है, जब किसी जोड़ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और उसे सहारा देने वाले लिगामेंट्स अपनी क्षमता से अधिक खिंच जाते हैं या टूट जाते हैं। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- चलते या दौड़ते समय पैर का गलत तरीके से मुड़ना मोच का सबसे आम कारण है।
- फुटबॉल, बास्केटबॉल और टेनिस जैसे खेलों में, जहाँ तीव्र गति और अचानक मुड़ने की आवश्यकता होती है, जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके अलावा, गलत तकनीक या अचानक जोड़ मुड़ने से लिगामेंट को चोट लग सकती है, जबकि अत्यधिक भार से मांसपेशियों या टेंडन में स्ट्रेन भी हो सकता है।
- हाई हील्स या बिना आर्च सपोर्ट और ग्रिप वाले जूते पहनने से टखने की स्थिरता प्रभावित होती है, जिससे पैर के मुड़ने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
- सीढ़ियों से उतरते समय, गीले फर्श पर संतुलन खोने या साइकिल से गिरने के दौरान शरीर को संभालने के प्रयास में पैर के जोड़ों पर अचानक तीव्र झटका लगता है।
- यदि पहले कभी मोच आ चुकी हो या जोड़ के आस-पास की मांसपेशियाँ कमजोर हों, तो वे जोड़ को पर्याप्त स्थिरता नहीं दे पातीं, जिससे बार-बार मोच आने की संभावना रहती है।
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मोच के प्रमुख लक्षण (Symptoms)
मोच की गंभीरता के आधार पर इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। प्रभावित हिस्से में मोच आने पर सामान्यतः निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं:
- प्रभावित जोड़ पर वजन डालते समय या उसे हिलाने पर हल्की असुविधा से लेकर अत्यधिक तीव्र दर्द महसूस होना।
- चोट वाली जगह पर सूजन और नीला/बैंगनी निशान पड़ना।
- लिगामेंट्स में खिंचाव या क्षति होने के कारण प्रभावित हिस्से को सामान्य रूप से हिलाने में गंभीर परेशानी होना।
- चोट लगने के ठीक उस क्षण जोड़ के भीतर कुछ टूटने या ‘पॉप’ जैसी आवाज महसूस या सुनाई देना। हालांकि केवल पॉप की आवाज से चोट की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।
मोच के लिए घरेलू उपचार
मोच आने के शुरुआती 48 से 72 घंटों के भीतर PRICE थेरेपी का पालन शुरुआती देखभाल के लिए उपयोगी उपचार माना जाता है:
- सुरक्षा (Protect): प्रभावित हिस्से को किसी भी संभावित बाहरी चोट या झटके से सुरक्षित रखें और उसे स्थिर करने के लिए स्प्लिंट या ब्रेस का उपयोग करें।
- आराम (Rest): चोट के शुरुआती समय में ऐसी गतिविधियों से बचें जिनसे दर्द बढ़ता हो। दर्द और सूजन कम होने पर, चोट की गंभीरता के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से धीरे-धीरे सामान्य गतिविधि, गति की सीमा और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम शुरू की जा सकती हैं।
- बर्फ की सिकाई (Ice): सूजन को नियंत्रित करने के लिए पहले 48 घंटों में हर 2-3 घंटे में 15-20 मिनट के लिए बर्फ से सेकें; ध्यान रहे कि बर्फ को हमेशा कपड़े में लपेटकर ही लगाएं, सीधे त्वचा पर न रगड़ें।
- दबाव/पट्टी (Compression): सूजन को रोकने के लिए प्रभावित जोड़ के चारों ओर एक इलास्टिक क्रेप बैंडेज (Crepe Bandage) को हल्के दबाव के साथ लपेटें। सुन्नपन, झनझनाहट, त्वचा नीली/ठंडी पड़ना या दर्द बढ़ना बैंडेज कसकर बाँधने का संकेत हो सकता है।
- ऊंचाई पर रखना (Elevation): बैठते या लेटते समय गुरुत्वाकर्षण की मदद से अतिरिक्त तरल पदार्थ और सूजन को कम करने के लिए प्रभावित अंग को तकिए के सहारे दिल के स्तर से ऊपर उठाकर रखें।
महत्वपूर्ण चेतावनी (क्रिटिकल केयर टिप्स):
- चोट लगने के शुरुआती 48 घंटों में प्रभावित हिस्से पर क्रेप बैंडेज को ज़्यादा कसकर न बांधें; इसे बहुत अधिक कसकर बांधने से उस हिस्से का रक्त प्रवाह रुक सकता है और सुन्नता आ सकती है।
- चोट के बाद दर्द के बावजूद गतिविधि जारी रखने से पहले से हुई चोट बढ़ सकती है या रिकवरी में देरी हो सकती है।
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
यदि चोट के बाद पैर या जोड़ का आकार असामान्य दिखाई दे, बहुत तेज या लगातार बढ़ता दर्द हो, पैर पर वजन डालना या चलना संभव न हो, बहुत अधिक सूजन हो, या प्रभावित हिस्से में सुन्नपन/झनझुनी महसूस हो, तो जल्द चिकित्सकीय जांच करवाएँ। पैर का ठंडा या नीला पड़ना, खुला घाव या हड्डी टूटने का संदेह होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
यदि हल्की लगने वाली चोट में भी कुछ दिनों के भीतर सुधार शुरू न हो, दर्द या अस्थिरता बनी रहे या बार-बार मोच आए, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मूल्यांकन करवाना उचित है। आवश्यकता पड़ने पर फ्रैक्चर या गंभीर लिगामेंट चोट की जांच के लिए एक्स-रे या अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
टखने की मोच एक आम चोट है। हल्की मोच में शुरुआती देखभाल, दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचाव और धीरे-धीरे सामान्य गतिविधि में वापसी से सुधार हो सकता है। चोट की गंभीरता के अनुसार rehabilitation और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भविष्य में दोबारा मोच आने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
बहुत तेज दर्द, अत्यधिक सूजन, पैर पर वजन न डाल पाना, जोड़ में अस्थिरता या विकृति, सुन्नपन या अन्य गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में योग्य डॉक्टर से जांच करवाएँ। जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट रीहैबिलिटेशन और सुरक्षित रूप से सामान्य गतिविधियों में लौटने में मदद कर सकता है।
चिकित्सकीय उपचार और डायग्नोस्टिक टेस्ट (जैसे एक्स-रे या एमआरआई) कभी-कभी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में, एक सही स्वास्थ्य बीमा का होना आपको अस्पताल के आकस्मिक खर्चों और इलाज की चिंताओं से मुक्त रखता है। सही समय पर लिया गया डॉक्टरी परामर्श और स्वास्थ्य बीमा कवर, दोनों ही आपको बिना किसी वित्तीय तनाव के स्वस्थ होने में मदद करते हैं।
डिस्क्लेमर: उपरोक्त जानकारी केवल संदर्भ उद्देश्यों के लिए है। सही चिकित्सीय सलाह के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। स्वास्थ्य बीमा लाभ पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अधीन हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने पॉलिसी दस्तावेज़ पढ़ें।