कई ऐसी बीमारियां है जिसकी वजह से आपको सांस लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उसी में एक है पल्मोनरी एडिमा। जब श्वसन स्वास्थ्य की बात आती है तो पल्मोनरी एडिमा जैसी समस्याएं आपको भारी परेशानी में डाल सकती है जिसके लिए आपको खास ध्यान देने और समझने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं, पल्मोनरी एडिमा क्या है, इसके लक्षण और कारण क्या है, इससे बचाव कैसे करें, इत्यादि।
पल्मोनरी एडिमा (फुफ्फुसीय एडिमा) क्या है?
पल्मोनरी एडिमा (फुफ्फुसीय एडिमा) को वेट लंग डिजीज के नाम से भी जानते है, जिसे फेफड़ों में पानी भरना भी कहते हैं। पल्मोनरी एडिमा एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिती है, जहां फेफेड़ों की वायु थैलियों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इस स्थिती में फेफड़ों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है और यह असामान्य द्रव के जमा होने से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का सही मात्रा में आदान प्रदान नहीं हो पाता है। इसके परिणाम स्वरूप आपको सांस लेने में परेशानी हो सकती है। यह स्थिती तिव्र रूप से भी हो सकती है और धीरे-धीरे भी विकसित हो सकती है। इसके अलग-अलग लक्षण और संकेत होते हैं। पल्मोनरी एडिमा के गंभीर स्थितियों से बचने के लिए समय पर निदान और सही चिकित्सा देखभाल बहुत जरुरी है।
पल्मोनरी एडिमा कितने प्रकार के होते हैं?
आमतौर पर फेफड़ों में पानी भरने के दो प्रकार होते हैं:-
- कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा - इस स्थिती को हृदय से जुड़ी पल्मोनरी एडिमा कहा जाता है, यह आपके हृदय में दबाव बढ़ने के कारण उत्पन्न होता है।
- नॉन-कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा - इस प्रकार के पल्मोनरी एडिमा हृदय में दबाव बढ़ने के कारण उत्पन्न नहीं होता है, यह सीधे तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करती है।
वेट लंग डिजीज (पल्मोनरी एडिमा) के लक्षण क्या है?
छाती में पानी भरने के निम्नलिखित लक्षण हैँ:-
- घरघराहट की समस्या
- खांसी
- खांसी में बलगम और ब्लड का आना
- सांस फूलने की समस्या
- शारीरिक गतिविधियों के दौरान समस्या का और ज्यादा खराब होना
- लेटने पर सांस लेने में दिक्कत होना
- थकान लगना
- शरीर के नीचे के हिस्सों में सूजन
- दिल की अनियमित और तेज धड़कना होना
- वजन का जल्दी बढ़ना, खासकर पैरों के वजन में बढ़ोतरी
- निंद के दौरान सांस नहीं ले पाने के कारण अचानक उठ जाना, इ्तयादि।
फेफड़ों में पानी भरने के कारण और जोखिम कारक क्या है?
फेफड़ों में पानी क्यों भरता है? फेफड़ों में पानी जमा होने के कई कारण हो सकते हैं, इसके सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आमतौर पर, यह अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति के कारण होता है, ज्यादातर मामलों में यह हृदय से जुड़ी समस्याओं के कारण होता है। इसके कुछ अन्य कारण निम्नलिखित है:-
- ब्लड इंफेक्शन
- निमोनिया
- शरीर में सूजन और जलन की समस्या
- किडनी तक जाने वाली धमियों का सिकुड़ना
- कुछ खास तरह के कैमिकल के संपर्क में आना
- शरीर के कोई भितरी अंग का काम न करना, जिसकी नजह से तरल जमा होता है, जैसे लिवर सिरोसिस, किडनी फेलियर, हार्ट फेलियर, इत्यादि।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
ऐसे में निम्नलिखित स्थितियां होने पर तत्काल प्रभाव से डॉक्टर को दिखाना चाहिए:-
- सांस लेने में परेशानी होना या पसीना ज्यादा आना
- सांस लेते समय घरघराहट की आवाज आना
- अचानक से सांस फूलने की समस्या होना
- खांसते समय गुलाबी रंग का झागदार बलगम या थूक आना
- त्वचा के रंग में बदलाव होना, नीला या ग्रे होना
पल्मोनरी एडिमा का निदान कैसे किया जाता है?
फुफ्फुसीय एडिमा का निदान कई कारकों के आधार पर किया जाता है। सामान्य निदान निम्नलिखित है:-
- संपूर्ण शारीरिक जांच, जैसे श्वसन क्रिया, हार्ट बीट, इत्यादि
- कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी)
- ब्लड टेस्ट
- चिकित्सा इतिहास
- ईसीजी(इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)
- इकोकार्डियोग्राम
- चेस्ट एक्स-रे
- सीटी स्कैन
- एमआरआई
- पल्स ऑक्सीमेट्री
पल्मोनरी एडिमा से बचाव कैसे करें?
जिन लोगों में वेट लंग डिजीज का रिस्क ज्यादा होता है, उनको ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है और डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। यदि यह रिस्क हार्ट के किसी भी समस्याओं से जुड़ी हुई है तो संतुलित आहार का सेवन और शरीर के वजन को मेटेंन करने से इसके रिस्क को कम किया जा सकता है। इसके अलावा निम्नलिखित तरीकों से हार्ट को हेल्दी रखा जा सकता है:-
- नमक का ज्यादा सेवन करने से शरीर में पानी जमा हो सकता है और हृदय का काम बढ़ जाता है। ऐसे में नमकयुक्त डाइट के सेवन को कम करना फायदेमंद हो सकता है।
- शरीर में कोलोस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होने पर धमनियों में फैट जमा हो सकता है और इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रोल कम करके भी पल्मोनरी एडिमा के रिस्क को कम किया जा सकता है।
- धूम्रपान कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जिसमें लंग डिजीज, हार्ट डिजीज, ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याएं शामिल है। धुम्रपान बंद करना भी फुफ्फुसीय एडिमा जैसी समस्याओं से बचाता है।
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सारांश
पल्मोनरी एडिमा एक ऐसी बीमारी है जहां आपके फेफड़ों में पानी जमा हो जाता है। इस बीमारी को फुफ्फुसीय शोफ या वेट लंग डिजीज के नाम से भी जानते हैं। फेफड़ों में पानी जमा होने से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का सही मात्रा में आदान प्रदान नहीं हो पाता है। जिसके कारण सांस लेने में समस्या, सांस फुलना इत्यादि जैसी समस्याएं हो सकती है। यदि आपको ऐसा लगता है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत होती है।
सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती है और आपको अस्पताल में भर्ती होने की नौबत तक आ सकती है। इस तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज में काफी पैसे खर्च होने की संभावना होती है। चाहें तो आप गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा करा सकते हैं, जहां आपको गंभीर बीमारियों में लगने वाले पैसों और अस्पताल के लिए भटकने की जरूरत नहीं होती है।
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डिस्क्लेमर: उपरोक्त जानकारी केवल संदर्भ उद्देश्यों के लिए है। सही चिकित्सीय सलाह के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। स्वास्थ्य बीमा लाभ पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अधीन हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने पॉलिसी दस्तावेज़ पढ़ें।